"उठो तो ऐसे उठो फक्र हो बुलंदी को भी, झुको तो ऐसे झुको बंदगी भी नाज़ करे ।"
Utho to aise utho phakr ho bulandee ko bhee, jhuko to aise jhuko bandagee bhee naaz kare.
If you rise, then rise in such a way that even the height should be proud, if you bow down, then bow down in such a way that worship should also be proud.
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तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे, तुम मिल गए तो गुलशन की तरह खिल जायेंग�...
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हर रोज़ गिरकर भी मुकमल खड़े है, ए जिंदगी देख मेरे होंसले तुझसे भी बड़े ह...
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तुम्हारा इस कदर असर हुआ है मुझ पर आजकल बिना वजह मुस्कुराने लगता हूं...
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उठो तो ऐसे उठो फक्र हो बुलंदी को भी, झुको तो ऐसे झुको बंदगी भी नाज़ क�...
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उठो तो ऐसे उठो फक्र हो बुलंदी को भी, झुको तो ऐसे झुको बंदगी भी नाज़ क�...
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